आज वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति इस तीव्र गति से अग्रसर है कि इसका प्रभाव हमारे सामाजिक जीवन पर पड़ रहा है। यह प्रगति की ही देन है कि परंपराओं की व्याख्याएँ बदल रही है, संबंधों की परिभाषाएँ बदल रही हैं। हमारी मान्यताओं के तार खिंचे चले जा रहे हैं और लक्ष्मण रेखा की परिधि विवादास्पद है। इन्हीं मुद्दों पर मथुरा कलौनी का यह नाटक स्त्री - पुरुष संबंधों पर उलझे कुछ प्रश्नों का उत्तर देने की चेष्टा करता है।
चित्रा का पति शेखर चित्रा की अपेक्षाओं में खरा नहीं उतरता है। उसे अपने भाग्य से शिकायत है। उसे अपने ऑफिस का सहकर्मी जगदीश बहुत आकर्षक लगता है और वह उसके साथ अपने संबंध बढ़ाती है। शेखर का मित्र संदीप सोनम से प्यार करता है तथा शादी करना चाहता है पर जब वह शेखर और चित्रा को देखता है तो अपना इरादा बदल देता है। शादी के चक्रव्यूह में नहीं फँसना चाहता। वह पाता है कि संबंधों का समीकरण उलझ के रह जाता है। यहाँ कोई भी गुत्थी सहजता से नहीं खुलती। |