सुबह का भूला
बंगलौर

नाट्य संस्था - कलायन
लेखक - मथुरा कलौनी
निर्माता और निर्देशक - मथुरा कलौनी

नवंबर 21 2010 को सुबह11:30 बजे

वह धारे पर जब भी जाती, एक टीस उभरती थी। यहीं उसने लापता होने वाले को पहली बार अच्छी तरह से देखा था .......
एक सुबह को ठीक उसी जगह उसने एक अपरिचित को लेटे हुए पाया। पास जा कर देखा तो जी धक्‌ से रह गया। वही चेहरा था। युद्ध की विभीषिका में न जाने क्या क्या झेलना पड़ा हो......
एक उत्‍तराखण्‍डी युवक और उसकी परित्‍यक्‍ता पत्‍नी की कहानी, भारत-पाक युद्ध की पृष्‍ठभूमि में।

 

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