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शुभ दीपावली |
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पराशर गौड़ |
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दीप जलाने हों तो, मन के दीप जलाओ
नफरत का तिमिर हटा, चेहरों पर मुसकान लाओ
बिघ्नो की लौ जले, छितिज पर नया सबेरा हो
इन्द्र धनुष सा बिखरे प्यार, शान्ति मिलन के अबसर हो
दिशा दिशओं हटे तम्, उजियारे भर कर लाओ
दीप जलाने हों तो, मन के दीप जलाओ
पुलकित हों दिन रात हर्षित शाम सबेरा हो
आशाओं की बाती में कल के सपनो का मंजर हो
कटुता मिट जाए मन से भावनाओं के दीप जलाओ
दीप जलाने हों तो, मन के दीप जलाओ
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